
अभी अग्निव और श्रेष्ठ उस पार्टी में थे, जहां सभी हाई क्लास लोग थे। अग्निव और श्रेष्ठ एक जगह पर बैठकर आसपास के लोगों को अपनी ठंडी नज़रों से ऑब्जर्व कर रहे थे। तभी वहां एक आदमी आया और उन दोनों की तरफ देखकर उनका ध्यान अपनी तरफ खींचते हुए बोला, "हैलो सर... "
उस इंसान को देखकर उन दोनों की आंखें सिकुड़ गयी। अग्निव ने अपनी एकदम ठंडी आवाज़ में उससे पूछा, "मैंने तुम्हें पहचाना नहीं। कौन हो तुम?" श्रेष्ठ की भी नज़रे उसपर ही टिकी हुई थी।












Write a comment ...