
अभी भी वो लोग निधि के रूम के बाहर खड़े थे। इकनूर माया और यथार्थ को अपनी खा जाने वाली आंखों से घूर रही थी। तभी उसके कानों में एकाग्र की आवाज़ पड़ी, "नूर... " उसकी आवाज़ सुनते ही इकनूर ने अपना पुरा ध्यान एकाग्र पर दिया, "हा अंकल बोलिये?"
वो अब माया और यथार्थ को घूरते हुए ही इकनूर से बोला, "यहां से चलते हैं और वैसे भी इन जैसे फालतू लोगों पर टाइम वेस्ट करने का कोई भी फायदा नहीं बेटा।" शिवम खुद भी एकाग्र की इस बात से सहमत होकर अपना सिर हिलाने लगा।












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