
अभी उस रूम में सिर्फ कनिष्क था और चांद सोयी थी। कनिष्क उसके पास बैठा हुआ था की तभी उसकी नज़र चांद पर पड़ी। चांद अपनी नींद से जाग रही थी और इसी वजह से उसकी बंद आंखों की पलकें भी हिल रही थी।
उसे उठते हुए देखकर अब कनिष्क पूरी तरह से अलर्ट हुआ और चांद की तरफ झुककर उसके माथे को चूमने के बाद धीरे से उसका हाथ पकड़ते हुए अपनी सॉफ्ट टोन में बोला, "आराम से अपनी आंखें खोलिए बच्चु... डैडी यही हैं... "












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