
कनिष्क ने चांद की तरफ देखा जो उसके सीने से चिपकी हुई थी। कनिष्क उसके बालों को सवार कर उसके माथे को चूमते हुए बोला, "घर चले बच्चा?"
इसपर चांद अपना सिर हिलाकर बोली, "हम्म।" तभी रूम का दरवाजा खुला और विहान वहां आते हुए कनिष्क से बोला, "अरे वाह। तु भी यही हैं... "










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