
अभी अग्नि सिया और शरण्या के साथ राजवंश पैलेस के मेन डोर पर खड़ा था, जो बंद था। शैल्य अभी भी उसकी नानु की गोद में था और टुकुर - टुकुर इधर से उधर ही देख रहा था।
अग्नि ने एक नज़र शरण्या पर डाली, जिसने उसे कुछ इशारा किया। उसका इशारा समझते ही शरण्या ने अपनी पलकों को झपकाया।









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