
वो सब उस आदमी के साथ उस इलाके में आये जहां उसकी बेटी का ससुराल था। धूप तेज थी जिस वजह से सिया का थोड़ा पसीना छुट रहा था और उसकी दूध सी गोरी चमड़ी भी लाल होने लगी।
कृशल ने जब ये देखा उसने सिया की साड़ी का पल्लू उसके सिर पर रखा और अपनी चिंता भरी टोन में बोला, "देखा इसीलिए मना किया था तुम्हें लेकिन तुम सुनोगी नहीं।"








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