
वो सब अभी भी बीच पर थे लेकिन उनकी नज़र कबीर पर नहीं थी जो खुद भी वहां था। कबीर ने अपने आदमियों को उनपर नज़र रखने बोला था और इसी वजह से उसे कायनात के बीच पर होने वाली बात पता चली।
कबीर का चेहरा गुस्से की वजह से एकदम लाल हुआ था और वो दूर से ही हंसती - खिलखिलाती हुई कायनात को घूरते हुए खुदसे ही बोला, "मेरे सभी इरादों पर पानी फेरकर खुद मजे कर रही हैं कायनात लेकिन मेरे रहते ये सब कैसे हो सकता हैं। मैंने तुझसे सीधे तरीके और प्यार से बोला की मेरे साथ चल लेकिन तुझे मेरी बात नहीं माननी थी तो अब देख मैं कैसा टेढ़ा रास्ता यूज करता हुं।"








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