
अभी उन तीनों बहन - भाई की नज़रे शरम से नीचे झुकी हुई थी। सब लोग उन तीनों को अपनी गुस्से भरी नज़रों से घूर रहे थे।
शरण्या अपना सिर पकड़ कर एक चेयर पर बैठ गयी और खुदको कोसकर रोते हुए बोली, "गलती हमारी हैं। हमें सिया को बता देना चाहिए था की वो बच्ची हमारी नहीं लेकिन मेरी फ्रेंड की हैं। मैं तो बस उसे कुछ घंटों के लिए अपने साथ लेकर आयी थी सोचा था मेरी सियु खुश हो जायेगी पर मुझे क्या पता था की मैं उसे घर लाकर इन लोगों के घटिया प्रैंक को अंजाम देने जा रही हुं।"








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